
हे ! नारी
बड़ा मान सम्मान सभी का
विजय पताका फहराई है
घूंघट में रहकर भी हे ! नारी
तूने अपनी रीत निभाई है ।
नतमस्तक हम तेरे आगे
नभ में सीना तान दिया
चूल्हा चाखि छोड़ जिसने
मंजिल को अंजाम दिया ।
है नमन हे! नारी, तुझको
कर्तव्य पथ पर बढ़ते चलो
रुकना ना कभी झुकना ना कभी
राह प्रशस्त करते चलो ।।
रचनाकार
कमल सिंह
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