एक नूर सा चेहरा, छुपा है अदब के उस गुलशन में
मखमली रेशमी जुल्फें, तरंगित हो उठी इस मन में
ना वक्त की यह रंजिश,अब, मुझको गवारा साहिबा
दिल जज्बातों को ,यूं ना छोड़ो अब तुम उलझन में ।।
मेरी रचना
कमल कुंज
9667616433
एक नूर सा चेहरा, छुपा है अदब के उस गुलशन में
मखमली रेशमी जुल्फें, तरंगित हो उठी इस मन में
ना वक्त की यह रंजिश,अब, मुझको गवारा साहिबा
दिल जज्बातों को ,यूं ना छोड़ो अब तुम उलझन में ।।
मेरी रचना
कमल कुंज
9667616433
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